ज्योतिष शास्त्र एक प्राचीन वैदिक विद्या है, जिसके माध्यम से ग्रहों, नक्षत्रों और राशियों के प्रभाव को समझकर मानव जीवन की दिशा का अध्ययन किया जाता है। यह विद्या व्यक्ति के जन्म समय, तिथि और स्थान के आधार पर उसकी कुंडली का विश्लेषण कर जीवन की संभावनाओं, चुनौतियों और अवसरों को स्पष्ट करती है।
ज्योतिष के अनुसार, ग्रहों की स्थिति व्यक्ति के स्वभाव, स्वास्थ्य, शिक्षा, करियर, विवाह और आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रभाव डालती है। सही ढंग से की गई कुंडली विवेचना से व्यक्ति अपने जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव को समझ सकता है और उचित निर्णय लेने में सक्षम होता है। ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और मार्गदर्शित करने का माध्यम है।
ज्योतिष शास्त्र में ग्रह दोष, दशा-महादशा, गोचर और योगों का विशेष महत्व होता है। इनका सही विश्लेषण कर ग्रह शांति, रत्न, मंत्र, पूजा और अनुष्ठान जैसे उपाय बताए जाते हैं, जिससे नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकारात्मक परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
ज्योतिष हमें यह सिखाता है कि जीवन पूरी तरह भाग्य पर नहीं, बल्कि कर्म और विवेक पर भी निर्भर करता है। ग्रहों के संकेतों को समझकर व्यक्ति अपने कर्मों को सही दिशा में ले जा सकता है और जीवन को अधिक सफल एवं सुखद बना सकता है।
ज्योतिष शास्त्र के माध्यम से हम अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य को समझकर जीवन में सही मार्ग का चयन कर सकते हैं।